Friday, 6 January 2017

ગઝલ

*अंधे ख्वाबों को उसूलों का तराजू दे दे !*
*मेरे मालिक मुझे जज़्बात पे काबू दे दे !!*

*मैं समंदर भी किसी गैर के हाथों से न लूं !*
*एक क़तरा भी समंदर है अगर तू दे दे !!*

*मैंने आँगन में लगा रक्खे हैं खुशरंग गुलाब !*
*देने वाले मेरे इन फूलों को खुश्बू दे दे !!*

*सब के दुःख दर्द सिमट जाएँ मेरे सीने में !*
*बाँट दे सबको हंसी ला मुझे आँसू दे दे !!*

--- जावेद अख्तर

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