Sunday, 1 January 2017

ગઝલ

धधगती  तेज-धाराओ  बधामां छे
ने ठंडा हिम-किनाराओ बधामां छे

जरा  मूंगा   ईशाराओ   बधामां  छे
उछलता उफ् उभाराओ बधामां छे

बधाने   होय  सूरज  पोतपोतानो
चमकतुं नभने ताराओ बधामां छे

बधां आनंद मिश्रीत शोक माणे छे
कहो ,ठालां  ठठाराओ बधामां  छे

शरत पोतानी राखीने बधां बेठा
धजा,धूणी,धखाराओ बधामां छे

                   भरत भट्ट

No comments:

Post a Comment