बीता हुआ सुहाना वो पल याद आया !
हुआ है अब आँखसे ओज़ल याद आया !!
खेत-खालियाँ,चौपाल वो कच्चा रास्ता !
शाम की धूलका वो महल याद आया !!
बुढ़ापा ढोता है बेकार उम्र का वजन !
नाजुक बचपन का पल याद आया !!
अम्बर,पंछी,डाल,धरती और हवा !
आपस का रिश्ता सरल याद आया!!
जो दिलकश था वो सब याद है !
जो भूलना चहाँ हरपल याद आया !!
ए वक्त! ठहर"शील"जिद्द पै है,क्यूँ की !
उसे पूराना गूंजता महल याद आया!!
....हेमशिला माहेश्वरी....."शील"
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