Wednesday, 8 February 2017

ગઝલ

बीता हुआ सुहाना  वो पल याद आया !
हुआ है अब आँखसे ओज़ल याद आया !!

खेत-खालियाँ,चौपाल वो कच्चा रास्ता !
शाम की धूलका वो महल याद आया !!

बुढ़ापा ढोता है बेकार उम्र का वजन !
नाजुक बचपन का पल याद आया !!

अम्बर,पंछी,डाल,धरती और हवा !
आपस का रिश्ता सरल याद आया!!

जो दिलकश था वो सब याद है !
जो भूलना चहाँ हरपल याद आया !!

ए वक्त! ठहर"शील"जिद्द पै है,क्यूँ की !
उसे पूराना गूंजता महल याद आया!!

....हेमशिला माहेश्वरी....."शील"

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