Sunday, 26 February 2017

અછાંદસ

बहोत दिनों के बाद
आज
दिल बहुत खुश है ,

कितने दिनों का इंतज़ार
आज ख़त्म होगा ..
हवाएँ महक उठी है,
जैसे किसी ने
उसमे इत्र न घोला हो !

मैं भी चहक उठी हूँ
महक उठी हूँ
उसको सोचते हुए
उसके एहसास से ..

बहुत तड़पाया है
उसके इंतज़ार ने,
बहुत रुलाया है
उसकी लापरवाहियों ने ,
बहुत सताया है
उसकी चुप्पी ने ....

"लड़ पडूँगी उससे
चिल्लाऊँगी उस पर
रूठ जाऊँगी
नहीं बोलूँगी ।"
ऐसा सोच के रखा है

सब पे पानी फिर गया....

उसके सामने आते ही
सारी शिकायतें
जैसे धुँआ हो गई ।

अब कुछ न रहा कहने को
बस वो बोला ...

"पागल , इतना प्यार करती हो !!!!"

मैं बस यही बोली ..
"हाँ ,पागल ...
सिर्फ तुम्हारी ...।"

~शबनम

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