जल्द ही आउंगा ये कहकर गया है
एक मौका पानी पीने घर गया है
ख्वाब बनकर आंख में अकसर गया है
रोज आकर रोज वो बचकर गया है
भूल बैठा हूं पुरानी दुश्मनी को
जख्म गहरा था मगर अब भर गया है
मैं कहां ताकत दिखा पाया हूं उसको
वो तो मेरे होंसले से डर गया है
बीच में ही बोल देते हो हमेशा
दिल बता दे बोल तू किस पर गया है
- किरनसिंह चौहान
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