Tuesday, 18 April 2017

ગઝલ

जल्द ही आउंगा ये कहकर गया है
एक मौका पानी पीने घर गया है

ख्वाब बनकर आंख में अकसर गया है
रोज आकर रोज वो बचकर गया है

भूल बैठा हूं पुरानी दुश्मनी को
जख्म गहरा था मगर अब भर गया है

मैं कहां ताकत दिखा पाया हूं उसको
वो तो मेरे होंसले से डर गया है

बीच में ही बोल देते हो हमेशा
दिल बता दे बोल तू किस पर गया है
- किरनसिंह चौहान

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