Monday, 17 April 2017

ગઝલ

उनका खयाल उनका तसव्वुर सदा रहा,
दिलमें  हमारे दीद का अरमां  लगा रहा।

बेताब कर  रही थी  हवाओं की नग्मगी,
कानों में गुंजता  शीरीं आलम  बना रहा।

मनको  लुभा रही  थी फजाऐं हसीनतर,
सांसो  का आना  जाना खुश्बु भरा रहा।

तस्वीर सी  उभरती रही  इक  निगाह में,
ख्वाबों में ऐक जल्वा सा पलता दबा रहा।

मासूम  तरस  रहे हैं जो तेरे  इन्तजार  में ,
अपनी  नजर  से दुर  मगर आशना रहा।

                मासूम मोडासवी

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