आवाज दे के उसने हमको बुलाया होता,
हमने खुशी से अपने सरको जुकाया होता।
हंसता खुशीका लम्हा दिलमें बसाया होता,
गमसे भरे अलम से खुदको बचाया होता।
जुकती हुइ नजर को गर थोड़ा उठा वो लेते,
अपना हसींन चहेरा हंसता दीखाया होता।
करते निसार अपना हम जानो दिल उसी पर,
उसने खुशीसे हमको अगर आजमाया होता।
हमराह चलते चलते बदली हैं जीसने राहे,
समजेथे जीनको अपना वो क्युं पराया होता।
उमीद थी हमारी हम उनको गले लगाते,
मौकामिलन का मासूम जो हमने पाया होता।
मासूम मोडासवी।
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