Tuesday, 25 April 2017

ગઝલ

तुम कुछ कहके रुक जाते तो अच्छा होता,
तुम यूँ दिल में ठहर गए होते तो अच्छा होता!

आज फिर से तेरी बेजुबान आँखों ने कुछ कहा ,
यादों को अश्कों में बहा लेते तो अच्छा होता!

वो हसीन शाम ने फिर से अंगड़ाई ली हे आज,
फिर से दिल में दस्तक देते तो अच्छा होता !

तुम्हारी अनकही बातें आज भी मुझे याद है,
तुम अपने लबो से कुछ कहते तो अच्छा होता !

बेवजह खुद को ही खुद ही मै ढूंढ रहा हूँ ,
तुम कही मुज़ मै ही समा जाते तो अच्छा होता !

रूपाली चोकसी "यश्वी"

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