Friday, 14 July 2017

ગઝલ

दिवार अगर है तो दरार होगी,
प्यार जो है तो तकरार होगी!

कोई ख्वाहीश नही सालोंसे दिल को,
होगी तो यकीनन समझ के बहार होगी!

बुढापे में जिंदगी देखो युं होगी,
कभी खांसी कभी बुखार होगी!

ईमान से भटके तो ये तय है की,
जहांनभरकी दुआऐ भी बेकार होगी!

लीखा है कुछ जो बहोत गहेराईमें था,
दाद की चाह तो जनाब सो बार होगी!

- दिपक ठाकर

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