ये फासले ये दुरी,
कुछ बात है अधुरी ।
करनी अभी हैं बाकी,
सब गुफतगु जरुरी।
उनको बगेर देखे ,
होती नहीं सबुरी ।
नजरें बचाना उनका,
ऐसी भी क्या गरुरी ।
कुछ काम ही न आइ,
अपनी ये बे कसुरी ।
सारे जख्म उठाके ,
करनी पड़ी सबुरी ।
मासूम जमाने वाले,
करते रहे फीतुरी ।
मासूम मोडासवी ।
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