तेरी खुशी ही आज भी अपनी खुशी रही,
फीरभी तुम्हारी चाहमें कितनी कमी रही।
चाहा वफा से आपको अपना बना सकें,
लेकिन तुम्हारे वस्ल की जाना गमी रही।
आगेे बढे थे हम बड़ी चाहत की आस में,
आये हमारे पास पर दुरी बनी रही।
दो चार लम्हे प्यार के उनके न पा सके ,
जीनके करम की आजभी हसरत जगी रही।
जीना हमारा इस कदर गम से भरा रहा,
मासूम वफाकी आरजु अपनी लगी रही।
मासूम मोडासवी
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