दर दर भटकते पांव को रस्ता।मिला नहीं,
गुंचा हमारी चाहका शायद खीला नहीं ।
हमको बहाके लाइथी चाहत की आरजु,
उस शोखे ना मुराद ने मौका दीया नहीं ।
साकी ने हंसके प्यार का सागर तो भर दीया,
ऐसा भी क्या हुवा जो हमने पीया नहीं ।
अरमां जगाने आयेथे दिल के करीब वो,
उसने हमारे साथ में दो पल जीया नहीं ।
जागी तलब के तोरके सपने जगा गये,
बदली निगाहे शोख का मासूम गीला नहीं ।
मासूम मोडासवी
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