रूह से जज़बात मिटाना चाहती हूँ !
आज मुज़े आज़माना चाहती हूँ !
जिंदगी तुम्हें थकाना चाहती हूँ !
पाँव जो आगे बढ़ाना चाहती हूँ !
जीस्त तो मेहमाँ कई दो चार दिन की,
भूल 'माँ' की गोद पाना चाहती हूँ !
गर इजाजत हो समय से मांग मैं
बाअदब का एक ठिकाना चाहती हूँ !
जिंदगी ने गम दिए लाखो मगर मैं
साँसो को अपना बनाना चाहती हूँ !
निशि सिंह
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