उनके सितमकी बात ही न पूछिए
इश्क़ करने वालोंकी ज़ात न पूछिए
दिन गुज़रा हो तन्हाई में जिसका
कैसे गुज़री फिर ये रात न पूछिए
जिसकी खामोशीमे ही है ज़वाब छिपे
ऊनसे कोई अब सवालात न पूछिए
वज़ह ज़ख्मकि हो जो कोई हमनवा
फिर कभी उनके ज़ज्बात न पूछिए
आग़ाज़"परम"इश्कका हो चूका हो तो
फिर वो"पागल"को अँजाम न पूछिए
- परम पागल
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