फiसलोने भी हमें कैसा धोखा दे दिया
तुम्हारी यादोंसे कभी दूर होने न दिया
न जाने कौन सी कशिश है तुममें अभी भी
कहीं ओर हमारी नझरोंको खोने न दिया
दिवारोंके साथ क्या मुशायरे हुवे रोज रात
रातोंको कभी हमको चैनसे सोने न दिया
मिले है कुछ ऐसे धोखे हमको इश्कमे की
जमानेने आंसुओसे इसको धोने न दिया
दिलकी ज़मीन को साफ़ करके बैठे थे हम
रकिबोने बीज महोब्बतका बोने न दिया
एक"परम"बेचैनी और ये मेरी जिंदगी
तेरे सिवा कहीं ओर"पागल"होने न दिया
(પરમ પાગલ)
No comments:
Post a Comment