Tuesday, 12 June 2018

ગઝલ

*तेरी बाहों में फ़ना*

तू बन मोहब्बत की शम्मा
मैं तेरा परवाना हो जाऊं,
,
तेरे इश्क़ की गलियों में घूमता
पागल दीवाना हो जाऊं
,
झुकती तेरी इन पलको में बहे जाऊ कही
जो हो मंझिल तेरी मैं वो किनारा बन जाऊं
,
अकेले खो जाओगी इस दुनिया की भीड़ में
"तू" मेरा और मैं तेरा सहारा बन जाऊं
,
कही ऐसा ना हो कि इंतेज़ार में तेरे छोड़ दु जीना
है तमन्ना के तेरी बाहों में *फ़ना* हो जाऊं
,
पत्थर के ताजमहल में दफन है कई ज़िंदा यादे खुशनसीब
मैं भी तेरे दिल की रियासत का सिकंदर बन जाऊं।

*सुनील पारवाणी*
_कवि खुशनसीब_

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