Tuesday, 12 June 2018

ગઝલ

रात   नींदोंमें    जगाया   है  मुजे
ख्वाब बनकर आज़माया है मुझे

आशनाई   मौतसे   बढ़ने   लगीं
जिन्दगीने  यु   सताया   है   मुजे

सच  यहीहै   वो न  ठेहरेगा कभी
वक़्तने   पीछे    लगाया  है  मुजे

जो समझ पाया नहीं मैं आजतक
तूने  वो  जल्वा  दिखाया  है मुजे

वो कभी मिल जाए तो है पूछना
उलझनों  में क्यूं फंसाया है मुजे !

       *- राहुल श्रीमाली*

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