रात नींदोंमें जगाया है मुजे
ख्वाब बनकर आज़माया है मुझे
आशनाई मौतसे बढ़ने लगीं
जिन्दगीने यु सताया है मुजे
सच यहीहै वो न ठेहरेगा कभी
वक़्तने पीछे लगाया है मुजे
जो समझ पाया नहीं मैं आजतक
तूने वो जल्वा दिखाया है मुजे
वो कभी मिल जाए तो है पूछना
उलझनों में क्यूं फंसाया है मुजे !
*- राहुल श्रीमाली*
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