जहां पे है आलम की ताकत भरी,
वहीं पर हुइ छेड हिंमत भरी
करी कीसने हरकत हीमाकतभरी,
जो कर बैठे जुरअत शरारत भरी
अमन के उसुलों की करते हैं बातें,
अमल में मगर है अदावत भरी
ये गुमराह दिमागों के इकदाम से,
फझाओं पे है कितनी दहशत भरी
हमारे ये रहबर हैं रीजअत परस्त,
खयालों मे जीनके है नफरत भरी
सियासत ने खेला युं जजबात से,
हरसू दहर में है आज वहशत भरी
जमाना युं आगे बढ़ा इसकदर,
जीधर देखो मासूम जहालत भरी
मासूम मोडासवी
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