हमणां अमे लीलाशनी वच्चे ऊभा छीऐ
कारण वगर आ घासनी वच्चे ऊभा छीऐ
लो,आम बंधाया नहीं के मुक्त पण नहीं
तो पण हजी क्या पाशनी वच्चे ऊभा छीऐ
दीवासली चांपी दीधी छे कोईऐ अने
अफवाओना पोटाशनी वच्चे ऊभा छीऐ
चीसो पडे छे कोई सांभलतुं नथी कशुं
कई रीतनी ब्हेराशनी वच्चे ऊभा छीऐ
जीवन रह्यु तो ऐक ऐ विडंबना रही
सहु त्रासदायक आशनी वच्चे ऊभा छीऐ
भरत भट्ट
No comments:
Post a Comment