धीमे धीमे अवाज बधां बंध थई जशे
नीरव थया पछी ज दुआ बंध थई जशे
तारा अबोल शब्दनां अर्थो नहीं जडे
अर्थो नहीं जडे तो कथा बंध थई जशे
तुं ऐटले के ऐक बगीचानुं फूल छे
मुरझाई जो जईश तो हवा बंध थई जशे
मारी उदास आंखने सपनुं नहीं मले
तारा विनानी सर्व दिशा बंध थई जशे
भरत भट्ट
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