Sunday, 25 December 2016

ગઝલ

धीमे धीमे अवाज  बधां बंध  थई  जशे
नीरव थया पछी ज दुआ बंध थई जशे

तारा अबोल  शब्दनां   अर्थो नहीं जडे
अर्थो नहीं जडे तो  कथा बंध थई जशे

तुं   ऐटले  के   ऐक   बगीचानुं  फूल  छे
मुरझाई जो जईश तो हवा बंध थई जशे

मारी उदास  आंखने  सपनुं नहीं मले
तारा विनानी सर्व दिशा बंध थई जशे

              भरत भट्ट

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