आजादी कलम..
पढा..ईतिहास,
एक गुझरा जमाना था,
कूवा,तालाब,नदीयाँ,झरने कैसे थे?
और ये आकाश भी?समंदर भी...?
सीमाए जमीनकी कहा तक? किसकी...?
किताबोकी हतकडियाँ खुली...!
तब आजादी की बुलंद आवाजके हर पेहलुपे...
पन्ने-पन्ने को पलटते हुए..!
कुछ पढेलिखे-कुछ अनपढ सत्याग्रही!सत्याग्रहकी राहपे
शब्द स्वतंत्र और संविधान-विधान...!
गौउर करते हुए पढा,
गांघी हमारा आगे बढा,
बेरीष्टर कानुनमे मढा,
वकीलातकी सभी कलम,शब्द की एकघार कढा..
न्यायमे सब एकसाथ हवालातमे!!
ग्रहण कीया ?
संकल्प लिया..
आजादीका दिया..
क्यां कुछ आपने किया..?
ईतिहास हमारे भारतका..
ईन्कलाप हमारे भारतका..
सरताज हमारे भारतका..
हर वीर हमारे भारतका...
ध्वज त्रिरंगा लेके धर्मवीर था भारतका...
कवि जातेथे संग्राममे और युध्धके मेदानमे..
तब...
वो कलम की शाही रक्तसे लिखे
देशभक्तिके गीत सारथी और यौध्धा बने हर शब्दके वार जैसे
एकता बनी उस मंजीलको..
सलाम,
परमवीरको श्रघ्घांजली..
आजाद हिन्दुस्तानकी गली..
गांधी चले जीस राहपे हम
महाव्रती चले और
सरहदकी -हद
आजादीका पद-काव्य तद्
न्याय कलम
सच्चाई मलम
स्वतंत्र है,थी,रहेगी
जय-विजय,
हर हिन्दुस्तानीकी आवाज और कवि कलम
जाग्रुति मारु महुवा "जागु"
दिनाक-26-01-2017
समय-रात्री-12:30
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