करीब हमको बुलाते हैं
वोह दुरी भी निभाते है
वो डरते हैं जमाने से
महोबत भी जताते हैं
युं अपनी बांहैं फैलाकर
गले कब वो ,लगाते हैं । ?
इनायत से भरा जज्बा
हमें दिलसे दीखाते हैं
बनाकर आसका पर्दा
उठाते हैं गीराते हैं ।
हमारे सामने आकर
वो सब भुल जाते हैं ।
तराशे हुस्न का जल्वा
हमें मासूम दीखाते हैं ।
मासूम मोडासवी
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