Sunday, 5 February 2017

ગઝલ

कवच कुंडળ विशे विचारजो
अनोखा बળ विशे विचारजो

विचारो नहीं फकत तमने तमे,
तमे मंडળ विशे विचारजो

विचारो स्त्री अने पुरूष विशे
पछी व्यंढળ विशे विचारजो

थया वर्षो तमे मળया हतां
फरी अंजળ विशे विचारजो

विचार्युं एक रेगिस्तान में
तमे खળखળ विशे विचारजो
      --- धर्मेश उनागर

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