गझल
ऊडवानी होंश लईने बाजी लगावी दीधी
आकाश मापवामां पांखो गुमावी दीधी
साच्चे ज आवशे तुं ऐवा खयाले में पण
मननी गलीकूंचीओ केवी सजावी दीधी
ऐ धुम्रथी आ आख्खुं आकाश लागे भूरुं
सपनाओना समिधे धूणी धखावी दीधी
पगलीओ धीमे धीमे ओ पाडजे, पियुजी !
बिस्तर उपर हवे तो आंखो बिछावी दीधी
छे अंधकार ऐवो के, ओतप्रोत थईशुं
अवरोधती हती ऐ दीवी बूझावी दीधी
भरत भट्ट
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