सिद्ध का साबित लईने आवजो
एक मोटी जीत लईने आवजो
कोक दि नहीं नित लईने आवजो
के अनोखी रीत लईने आवजो
साव ऊभाऊभ ना आवो कवि
का गझल का गीत लईने आवजो
बाग थइ जाशे पछी जो जो तमे
फूल जेवुं स्मित लईने आवजो
जेम त्यां हुं लईने आव्यो ऐ रीते
आवजो तो प्रीत लईने आवजो
चंद्र देखाडीश तो धरती उपर
बारी वाली भींत लईने आवजो
--- धर्मेश उनागर
No comments:
Post a Comment