पीडा आपणी ,आपणी होय छे
बीजा माटे थोडी -घणी होय छे
पणे थापशे कोई मृदंगने
अहीं झांझरी रणझणी होय छे
हवे ऐ पीडे तो शुं अचरज कशुं
में पोते ज ईच्छा खणी होय छे
तने वाते वाते य वांकुं पडे
विचारोमां तारा अणी होय छे
समय नामनी केदमां आपणे
क्षणो क्यां बधी आपणी होय छे
भरत भट्ट
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