Monday, 17 April 2017

ગઝલ

आँखों में ससा लिया है तुमको
ख्वाबो में समा लिया है तुमको

जनाजे में तुजे देखकर मेने अब
अश्को में समा लिया है तुमको

मेरे मौला ये केसी रेहम है तेरी
दिलो में समा लिया है तुमको

बिखरे ख्वाब भी अब टूट गए
आयनों में समा लिया है तुमको

लाचारी नही ये अब आदत हो गई
बहानो में समा लिया है तुमको

मौत की परवाह मत कर ऐ "रहीश"
ग़ज़लो में समा लिया है तुमको

रहीश - दीपक सोलंकी

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