*|| महाराणो प्रताप ||*
*(छंद:- हरिणझंप)*
घर भारती पर राज अकबर
देस बाजे डंक दरदर
जंग जावण कौण आखर, बन गयो धर बाप
राजवी रावण समोवड
आथडे आर्याव्रते भड
एकलो खुंखार अणनम, पत रखी परताप *(१)*
पाप केरा राज भारत
वीर कोई आथडे रत
धर बधी रजपूत केरी, सब पचवतो साप
मात मेवाडी तणो पुत
तोडतो तरका तणा तुत
हिंद धारा हाम देतो, पुन्य अम परताप *(२)*
थाक तरतेे सामटो तज
रण लहुं रंगी सदा रज
दाज आखो देस करतो, हणो एवा पाप
आश आखर अमतणी तम
लाख झूंक्या एक अणनम
पण अरिनो जागतो जम , पक्ष्म नम परताप *(३)*
-कवि धार्मिकभा गढवी
9712422105
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