आपके नाम...
चल लीख ही देते है
आप के नाम
तनहाईयो से गुजरती रात और
भितरका आसमान...
मन का बसेरा और हर शाम से जुडी कायनात
कातील ठंडी मे चुप-चाप खडी हुँ!!
उलजती उन मौसमकी रंगीन बदलीका बरसना और मेरी आँखोका आँखोके सामने बना दर्पन लिये छलकना...
सबेरा जैसे स्वपनील अनुराग...
बजती उन पथ्थरोकी धुन से निकलता झरना ...
पानी-पानी को तरसना..
प्यासे मन को बरसना..
आँधीयोसे टकराती हुई उन हवाको
छु लिया है ..!
उन उचाईसे फिसलती -संभलती
पतवार लीये राहे...
आगेका फासला और ये आहे..!
यकीनन धडकता था दिल..!
रात का अंधेरा था और ये दिन..!
छलकता,जलगता हुवा रब का दिदार...
प्रक्रुतिका आँचल सजाता किरदार..
धने हुये बादल और रातका सुकान,
मेऩे उनकी आँखोमें ली जुकान
वक्त कुछ ऐसा था..!!
जैसे पलक-पलकते ही सफर-हम सफर और आखरी सफर..?
आपके नाम
जाग्रुति मारु महुवा "जागु"
दिनाक-25/05/2017
वक्त-शाम 7:30
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