माँ
तू ही शबनम,तू ही मोती !
तू ही मेरी जीवन ज्योति !
मेरे अस्तित्व की तू दाता ,
ममतामई , मेरी तू माता !
तू ही घाटी , तू ही चोटी !
तू ही मेरी जीवन ज्योति !
मोती आँखों में झिलमिल,
मेरे प्यार की तू बिस्मिल !
तू ही शाता ,तू ही विधाता !
तू ही मेरी जीवन ज्योति !
माँ , करुणा का तू है सागर,
तुझ से ही जग उजागर !
तू ही इलहाम ,तू ही शाम !
तू ही मेरी जीवन ज्योति !
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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