नथी वाचाળ तो खामोश क्यां छे
करो साबित अमारो दोष क्यां छे
अमारा प्रेमनुं वर्णन नहीं थाय
अरे एवा शबदनो कोश क्यां छे ?
मने पंडित मानी पाट दीधी
तमे जोयुं नहीं के होश क्यां छे
जरे छे मध सूकेली डाળखी पर
छता ऐ डाળखी मदहोश क्यां छे ?
कदी मंदिर नहीं पण खूदमां जा
खबर पडशे के आशुतोष क्यां छे
---धर्मेश उनागर
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