Friday, 14 July 2017

ગઝલ

इतना तेरे खयाल में डुबा रहा सदा,
बनते बिगडते हालमें डुबा रहा सदा।

तेरे करीब जिंदगी हंसती चला चली,
तेरे  बिछाये जाल में डुबा रहा सदा।

आकर मेरी हयात को अबतो संवार दे,
तेरी नजर की चाल में डुबा रहा सदा।

चाहत का होसला मेरा छलता रहा मुजे,
कितने हसीं सवाल में डुबा रहा सदा।

तेरे बगेरअब जिंदगी सुनी लगे मुजे,
काले बिखरते बाल में  डुबा रहा सदा।

बढ़ती गइ है तारीकी मासूम हयात की,
मनके बढ़े मलाल में डुबा रहा सदा।

                    मासूम मोडासवी

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