अब तक नज़र मे वो ही नज़ारा है देखिये
हर आईने में अक्स पुराना है देखिये
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ये जर्ब़ जो हब़ीब से मुझको मिला कभी
जीने का आज वो ही सहारा है देखिये
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अब आईने की मुझको ज़रूरत नहीकभी
नज़रो मे उनकी खुद को संवारा है देखिये
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जितना बसा है क़ल्ब मे मेरे जो प्यार ये
अब आपके ही नाम तो सारा है देखिये
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अग़्यार जो रहे थे बहुत दिल के आज तक
हमने जिग़र मे उनको उतारा है देखिये
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पहलू मे उनको ग़ैर के देखा है आज जो
दिल टूटने का ये तो इशारा है देखिये
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दीदार रू ब रू जो मेयस्सर न हो सका
तो ख्वाब़ मे ही उनको निहारा है देखिये
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जब से नज़र मे मेरी वो महबूब है बसा
तब से हसीं नज़र का नज़ारा है देखिये
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वीरानियों का हर शू बसेरा थाजिस जगह
मंज़र वहाँ का आज तो प्यारा है देखिये
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ये तिश्नगी मिटाऊँ मैं "साहिल" यहाँ कैसे
जब अश्क़ अपनी आँख का ख़ारा है देखिये
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----------------(साहिल रामपुरी)----------------
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Thursday, 17 August 2017
ગઝલ
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સાહિલ રામપુરી
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