Tuesday, 29 August 2017

ગઝલ

मेरे प्यार में क्या कमी थी तुम अनजान बन गये
कैसे तुम देखते देखते कब मेरी जान बन गये..!!

दिल की हसरत की तुम्हें आँखो में भर लु सनम,
तुम्हे रंजिशे गम इतने हमसे की हम हैरान हो गये..!!

तुमने कभी हाल न पूछा फिरभी हम बताते गये
खता क्या थी हमारी की तुम हमसे परेशान हो गये..!!

मेरा कुछ सामान पड़ा है वो लौटा दे मुजको अब
यादों के सहरा मै अब हम फिरसे वेरान हो गये..!!

इश्क के नशा का आज भी लुत्फ़ उठाता हूँ ..
चाँद रखा है हथेली में तुम आसमान हो गये..

यश्वी

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