अशआर मिरे यूँ तो जमाने के लिए हैं
कुछ शेर फ़क़त उन को सुनाने के लिए हैं
अब ये भी नही ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
आँखों में जो भर लोगे, तो कांटे से चूभेंगे
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं
सोचो तो बड़ी चीज है तहज़ीब बदन की
वरना तो बदन आग बुझाने के लिए है
ये इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें
इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए हैं
. . जाँनिसार अख्तर
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