Friday, 16 March 2018

ગઝલ

हमको बडी अजीज जीनकी खुशी रही,
हस्ती में इस तरहा बसउनकी कमी रही।

उनसे वफाकी आस में भरते रहे कदम,
चाहत में जीनकी डुबी सदा जिंदगी रही।

हमको नसीब ने कभी मिलने नहीं दीया,
हसरत मगर हमारी फीरभी बनी रही।

कैसे बताऐं  हम ये करते है याद उनको,
सुब्हो शाम मनमें जीनकी यादे बसी रही।

आखों मेंबस गये हैं सपने हसीन सफर के,
उमीद की कली हमेशा मनकी खीली रही।

उनसे वफा की आस का अरमां बना रहा,
दिल में हमारे प्यार की शम्आ जली रही।

आकर करीब मासूमकुछफासला निभाया,
उनके हमारे दरमियां इक दुरी बनी रही।

                             मासूम मोडासवी

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