Tuesday, 12 June 2018

ગઝલ

*प्रमुख साहित्यिक व्हाट्सएप समूह 'कलम अर कटार' का संयुक्त सृजन---*
         भक्ति, शक्ति व नीति की अजस्र निर्मल धारा प्रवाहित करने वाले प्रमुख व्हाट्सएप समूह 'कलम अर कटार' के कलमकारों का शिक्षाप्रद नीतिगत संकलन सादर निजर--

🌹 *बोलो मीठा बोल* 🌹
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आखर आखर ऊजळा,आखर घणा अमोल। राजी मन सूं राजवी,बोलो मीठा बोल।।

जग में थोड़ो जीवणो,मती कराजै मोल।
सोबतड़ी बांटण सदा,बोलो मीठा बोल।।

आया सुकवी आंगणै,करण कीरत किलोळ। आयां रौ आदर घणो,बोलो मीठा बोल।।

तान सूं तान मिली,रतन!हुई रमझोल।
मान गयो कव मानसी,बोलो मीठा बोल।।

मऊ बधासां मोद सूं,मिनखां राखण मोल।
कीरत कलम कटार री,बोलो मीठा बोल।।

*--संग्राम सिंह सोढा*
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निवण करो नित नाथ ने  खाता दिल रा खोल
सबद सबद कर साधना बोलो मीठा बोल

नाद निपट निकल़े नहीं .ढीला पडया ढोल
तन रा तंतु ताण कर बोलो मीठा बोल

तन तंबूरा तन तना तान तान तन तोल
बार-बार बहू बार बस बोलो मीठा बोल

पल़कै पिंजर पातकी पोली पोलम पोल
बातां हन्दी  बानगी बोलो मीठा बोल

*--रतनसिंह चांपावत,रणसीगांव*
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अणतोल्या नही बोलणो,बोलो हिरदे तोल।
तोल मोल कर बोलणो,बोली मीठी बोल।।

बोली सोच र बोलनी,करणो सोच र कौल।
बोली ब्रह्म समान है,बोली मीठी बोल।।

कानाफूसी कान में धड़े,बजारा ढोल।
सोच समझ र मानवी,बोली मीठी बोल।।

सांची बाणी बोलणी देवे,आँख्या खोल।
मन मार मत मानवी,मीठी बोली बोल।।

मिसरी सी मिठी घणी,दयो शब्दा संग घोल।
सारो जगत सरावतो,बोली मिठी बोल।।

सांची बाणी बोलणी,देवे आँख्या खोल।
मन मारे मत मानवी,मीठी बोली बोल।।

झूठ कपट चाले नही,खुल जावे है पोल।
सांची बाणी बोलणी,बोली मीठी बोल।।

साँच ने आंच आवे नहीं,सारा जग में डोल।
हिवड़े में आदर हुवै,बोली मीठी बोल।।

बोली मीठी बोल,आही रह जासी अठे।
जाणो बजन्ता ढोल,इक दिन सबने ही अवस।।

बोली मीठी बोल,नही लागे कोई दामडा।
कैवूं सांची खोल,सुनले म्हारा साथिया।।

*--श्रवणसिंह राजावत*
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जिहवा सू झकोळ,आखर लीजै अधरड़ा ।
बोली मीठी बोल,सुधमन सू लीजे सदा ।।

प्रेम सब्द पंपोळ,अंतर सू उठे इधका।
बोली मीठी बोल,रीजै रजवट राजवी।।

रहे अंतस् रो रोळ,ताक सबद तैं तोलता ।
बोली मीठी बोल,भरीजै हिंयो भावसूं।।

सबद सू मत चोल,वैवार ले मुधरा वयण ।
बोली मीठी बोल,सुधारस तू चाखले ।।

मानां इण संसार में,हंस सरूपी संत ।
अरे इण हंसा रै देश में,बुगला करै अानंद ।।

आरो लगा न आखरां,सहारो सब्द सतोल ।
लारो मत ले लेश भी,बोली मीठी बोल।।

छंदा हंदी  छोळ,गंदी मत कर गैलिया
बोली मीठी बोल,बंदी रख अेक ब्रह्म री।।

तवां हियबिच तोल,बोलो सदा ही बेलियो।
बोली  मीठी बोल,जगवाळा घण जाणसी।।

*-डॉ. लक्ष्मणसिंह राठौड़,गडा़*
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प्रीत हिंयै  सूं पाळणी, रीत न धूड़ै रोळ|
जीत हौवसी जगत में,बोली मीठी बोल||

पोली बेवै  पदमणी, डोळी डावां  डोल़|
भोली़ व्हैगी भरम सूं,बोली मीठी बोल||

सांचाणी रख सांचमन,जीव पीव झकझोल़|
लूट लियौ  इण लोक नै, बोली  मीठी बोल||

सांची संपत साथियां,ऊँची रहै अतोल|
सैणां रहजौ सांतरा, बोली मीठी बोल||

अंतस कर आराधना,सदा सुधारस घोल़|
पाछै  थाळ  परोसजै, बोली मीठी  बोल||

मिट जावै चिंता मनां,डणकै डीळ'र डोळ|
चंगौ  रहणौ  चाव  सूं, बोली  मीठी बोल||

आखर भाखर आपरां,साकर जिमी सतोल|
ठाकर  रहजै  ठाट  सूं, बोली  मीठी  बोल||

चोरी करै न चोरटां,आखर हैं अणमोल|
सखा परोटो शान सूं, बोली मीठी बोल||

मन हरखावै  मोद सूं, हिंवड़ै उठै हबोल़|
प्रीत तणा भर पांवडा,बोली मीठी बोल||

लिछमण थांरी लेखनी,साहित सबद सतोल|
जीत लियौ  ओ जीव तैं, बोली  मीठी  बोल||

*--महेंद्रसिंह सिसोदिया 'छायण'*
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करणों सबरो कायदौ,मिनखां रखणो मोल।
मूंडे मिश्री घोळनैं,बोलो मीठा बोल।।

अंतस राखौ ऊजलौ,स्नैह राखौ सतोल।
भांग भरम री भींत नैं,बोलो मीठा बोल।

हेले पण हाजर खड़ा,करम निभावै कौल।
मन रा मीठा मानवी,बोलै मीठा बोल।।

प्रीत रीत सूं पाळणी,आदि सनातन ओळ।
रक्ख भरोसो राम रो,बोलो मीठा बोल।।

मानव रीझै मोद सूं,खोटो चढ़ियो खोळ।
अंतस मोटी आरियां,बोलै मीठा बोल।।

*--मानसिंह राठौड़ 'भुरटिया'*
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पाळी चाले पदमणी,काया करै किलोल।
आई पीव रे आसरे,बोली मीठी बोल।।

प्रीत रखे जग पारखूं,जीवन जग अनमोल।
सुण लीजै सब सांचमन,बोली  मीठी बोल।।

परम धरम प्रवीण सह,खरौ निभावौ कोल।
साच वात छळकावतां,बोली  मीठी बोल।।

संपत उण घर रैवसी,मधरा बाजे ढोल।
असल कमाई आपरी,बोली मीठी बोल।।

आज मिळ सगळा खपा,विणती कर अणमोल।
धारण कर सो धारणा,बोली मीठी  बोल।।

*--तेजसिंह राठौड़*
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सबदां माय मिळावणो,अपणापे रो घोल ।
मिलियाँ पण नी पांतरै, बोलो मीठा बोल ।।

आखर मधरा ओपता,ताकड़ियाँ में तोल ।
नेह बहै जिण नाळियां,बोलो मीठा बोल ।।

ऐड़ा सबद उकेरणा,ढम ढम बाजै ढोल।
मन रीझै हद मोकळा, बोलो मीठा बोल।।

कंजूसी नी बरतणी,केणों हिवड़ो खोल ।
अंतस सीधा ऊतरै,बोलो मीठा बोल ।।

कोयल ज्यूँ ही बोलणो,कागा रो नी मोल।
मनमोही अर मोवणा,मीठा बोलो बोल ।।

बिना प्रेम सूँ बोलणो,नैया डांवाडोल ।
साँभल नै पतवार तूँ,बोलो मीठा बोल ।।

मीठे मन रा मानवी,बरसां उठै हबोल ।
अंते में छप जावसी,बोलो मीठा बोल ।।

हेत सूँ जकड़ सांवठा,गूँजा मेळ किलोळ ।
बरसां तक नी वीसरै,बोलो मीठा बोल ।।

सोच समझ नैं खरचणां,आखर है अणमोल ।
मोल नही व्है आखरां,बोलो मीठा बोल।।

सबद घाव नित तड़पते, रैवै मन नित झोल।
बोल्यां पेली विचारणो,बोलो मीठा बोल ।।

*--कमल सिंह 'सुल्ताना'*
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मिल साथे बस रहवणो, मत ना कर रमझोळ।
सादो जीवण जीवणों, बोलो मीठा बोल।।

जीणो दिवस चार रो, बाकी डांवांडोल।
सिरजो सिर्जन सांतरा,बोलो मीठा बोल।।

बिणजारो बिणज करे,बढ बढ़ धारे मोल।
प्रीत मिले बिन मोल की,बोलो मीठा बोल।।

कळ सूं तो कळजुग बण्यो,काया बणियो खोळ।
माया मिनख मरावणी,बोलो मीठा बोल।।

साँचों सींचे सांच न,बाकी रापटरोळ।
झूठ जीभा न लावणी, बोलो मीठा बोल।।

कूड़ कदे ना बोलणो,कूड़ कपट रो खोळ।।
पथ चालो पत राख के,बोलो मीठा बोल।।

जोबन झीणों जोर को,झटपट खोले पोल।
गरब करण री गत बुरी,बोलो मीठा बोल।।

*--कुं नरपतसिंह 'नादान' कृत*
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सखरा आखर सोवणा,आखर सदा अमोल
आखर मत भाखर करै,बोलो मीठा बोल

औ जग आखिर छोड़णो,जबरो होसी मोल
कहे तेज कर साधना,बोलो मीठा बोल

मनरे मते नीं चलणो,मन हे तन रो ढोल
बजायां बुधी फिरे,बोलो  मीठा बोल

सदा रहे ओ नर सुखी,कोयल करे किलोल
कंचन ज्यो काया रहे,बोलो  मीठा  बोल

सलाम नर सगळा करे,सबद शबद रो घोल
शबद रिझावे स्याम,बोलो मीठा बोल

सरस बोल संग्राम रा,असल सीख अनमोल
मान महेंद्र तेज सब ,बोलो  मीठा  बोल

*--कवि तेज*
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🔵 *'कलम अर कटार व्हाट्सएप समूह से साभार*

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