Sunday, 28 October 2018

ગઝલ

कैसा  ये  मोड आया,
जीस्का न तोड आया।

दुनिया भली  पुरानी ,
पीछे में छोड आया ।

जीनेकी हसरतों में,
आगे में दौड आया।

रस्ता मिला न मंजिल,
अन चाहा मोड आया।

में भी कदम कदम पर,
खुं तक निचोड आया।

जुर्मो जफासे अपना,
नाता मे जोड आया।

इशरत की चाहतों में,
ख्वाबो को जोड आया।

छुटी तलाश अधुरी,
हर रीश्ता तोड आया।

मासूम बलाकी जद में,
हस्ती को छोड आया।

        मासूम मोडासवी

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