ऐवु नाटक छे जेने पडदो नथी
मात्र आंखो छे अने दृश्यो नथी
पंखीऐ बेसी कर्यो टहुको नथी
आपणे माणस छीऐ ,वृक्षो नथी
पोथी माथे मूकवा तर्को नथी
पंडितो पासे कशा तथ्यो नथी
हुं मने देखाउं छुं चारे तरफ
हुं ज मारी सामेथी हटतो नथी
रणझणी उठुं छुं झांझर जेम हुं
झांझरी पासे बीजा शब्दो नथी
आप निरुत्तर रह्या छो ऐटले
ऐटले मारी कने प्रश्नो नथी
चांद-सुरज जोई ऐवुं थाय के -
कोण क्हे छे आपने आंखो नथी
भरत भट्ट
No comments:
Post a Comment