Monday, 17 April 2017

ગઝલ

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शाहीमां टपकी गयुं तारुं स्मरण
शब्द थई वरसी गयुं तारुं स्मरण

हुं  ऊभो  छुं  टेकरीनी  टोच  पर
स्हेज आ लपसी गयुं तारुं स्मरण

हुं  हवामां  हाथ  विंझु  ने  पूछुं -
कई दिशा तरफी गयुं  तारुं स्मरण

आ अमासी  रातना  अंधारमां
दूरथी चमकी गयुं तारुं स्मरण

हुं मने विस्मृत थयो ने  ऐ  क्षणे-
आंखमां फरकी गयुं तारुं स्मरण

         भरत भट्ट

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