Tuesday, 23 May 2017

ગઝલ

हम आज उनके सीधे निशाने में आ गये,
चर्चे  हमारे देखो सारे फसाने में आ गये।

जीनकी मिलन की हमको रही आरजु बडी,
करके  हमीसे  वाअदे  बहाने में आ गये।

उनसे बनाके नाता जो ये दिन देखना पडा,
वोही  हमारे  दिलको  दुखाने में आ गये।

पहेली  नजर  में  जो हमें बेबाक से लगे ,
पर वो पड़ी असर मे  लजाने में आ गये।

यादों  में  रात  भरका मेरा जागना  रहा,
चाहत की आग भरके  जलाने में आ गये।

उनकी खुशी को हमने बचाया बहोत मगर,
हमसे  वो अपना राज छुपाने में आ गये ।

मासूम  नजर  नजर  से बचाने के वास्ते ,
दर परदा  हमसे आंख चुराने में आ गये ।

                      मासूम मोडासवी

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