ख़बर दिन की न रातों का पता है।
तेरे बारे में बस दिल सोचता है।
इशारे कुछ तेरी नज़रों के भी थे
नहीं मेरी ही सब इसमें ख़ता है।
रहूँ तन्हां या मेले में रहूँ मैं
हमेशा तुझको ही दिल ढूँढता है।
छुपाया कुछ नहीं तुझसे कभी भी
मेरे बारे सब तू जानता है।
बुरा है रोग दिल का है पता पर
दीवाना दिल कहाँ पर मानता है।
लुटा दी ज़िन्दगी ये जिसकी ख़ातिर
नहीं *हीरा* वो अब पहचानता है।
हीरालाल
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