स्वर्ग की कामिनी हो गयी
कल्पना उर्वशी हो गयी
मेघ संदेश लेकर उड़े
भावना यक्षिणी हो गयी
प्यास को तृप्ति के क्षण मिले
प्रीति कादम्बरी हे गयी
लो सफल हो गयी याचना
सृष्टि मधुवर्षिणी हो गयी
साधना जब शिखर पर चढ़ी
प्रीति अन्तर्मुखी हो गयी
आँसुओं का प्रलय देखकर
दृष्टि कामायनी हो गयी
लक्ष्य सत्यम्-शिवम्-सुन्दरम्
कामना जाह्नवी हो गयी
-सौरभ
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