मारा सुंदरी वर्णन ना छंद उपर कवी मित्र मीठाभाई खाने कहेल कवित
बावरे सुनले बाती , भामिनी हैं मन भाती ,
चमन चहचहाती , प्रिया जब पायगो ।।
बहु रहे बतियाती , खूब फोन खटकाती ,
मस्त नैंन मटकाती , हिय धड़कायगो ।।
ठीकर फोड़ ठुकराती , घर माहिं घुरराती ,
बकझक बतलाती , सो नह सुहायगो ।।
कहे बात कतराती , चढ़ जो बैठेगी छाती ,
चित ना सुहाती पर , पीछे पछतायगो ।।
मीठा मीर डभाल
परण्या बाद पछतावो
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