याद ही है तू मुझे ये फिर क्या हुआ है
आंख ज़रा सी नम है या कहीं धुआ है
लग गई है बाज़ी तो पीछे क्या मुड़ना
है दिल लगाना जुआ तो खेला जुआ है
है नहीं कोई आदमी कि चला जायेगा
ये मोहब्बत पीछे खाई तो आगे कुंवा है
बेवकूफी के तरीके क्यों ईजाद किए
हर दूजे घरमें खुदा जुदा - जुदा है
धरम मेरा इश्क़ के सिवा और क्या हो
कहता हूं सनम, तो वो मेरा खुदा है
न सिखाओ मुझे सहूलियत बंदगी की
हूं सूरज, और तु देखे दीपक बुझा है
अभी मैं कहूं तो अभी आयेगा यहां
दिखेगा नहीं, सनम मेरा, अजूबा है
- उदयन
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