ग़ज़ल
नए सालकी प्रीत मुबारक,
मिलने की ये रीत मुबारक।
कवि मिलन के हर मंच पर ,
तुम्हें तुम्हारी जीत मुबारक।
अक़्सर अपनी तन्हाइयों में ,
इक प्यारा सा मीत मुबारक।
बर्फ़ीले मौसम में होता रहे यूँ,
हा हा हू हू की शीत मुबारक।
नूतनता की इस महफ़िल में ,
दोस्तो सब को गीत मुबारक।
***
-कृष्णकांत भाटिया 'कान्त '
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