Sunday, 28 October 2018

ગઝલ

*_◆<<<Gazel>>>◆_*

_ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती...!!!_
*_छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती...!!!_*

_पहले दीप जलें तो चर्चे होते थे...!!!_
*_और अब शहर जलें तो हैरत नहीं होती...!!!_*

_तारीखों की पेशानी पर मोहर लगा...!!!_
*_ज़िंदा रहना कोई करामत नहीं होती...!!!_*

_सोच रहा हूँ आखिर कब तक जीना है...!!!_
*_मर जाता तो इतनी फुर्सत नहीं होती...!!!_*

_रोटी की गोलाई नापा करता है...!!!_
*_इसीलिए तो घर में बरकत नहीं होती...!!!_*

_हमने ही कुछ लिखना पढना छोड़ दिया...!!!_
*_वरना ग़ज़ल की इतनी किल्लत नहीं होती...!!!_*

_मिसवाकों से चाँद का चेहरा छूता है...!!!_
*_बेटा ......इतनी सस्ती जन्नत नहीं होती...!!!_*

_बाजारों में ढूंढ रहा हूँ वो चीज़े...!!!_
*_जिन चीजों की कोई कीमत नहीं होती...!!!_*

_कोई क्या राय दे हमारे बारे में  'राहत'...!!!_
*_ऐसों वैसों की तो हिम्मत नहीं होती...!!!_*

📝🔹शायर🔸राहत इंदौरी 🔹🔸

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