Sunday, 24 March 2019

ગઝલ

कुदरत ने तुजको बख्शा है रोशन जमाल हमदम,
रहेने  लगाहे  मुजको  तेरा  खयाल  हमदम।

मिलने की बे करारी  इतनी  बढी है  अबतो,
दिलको  सता रहा है  तेरा  जलाल  हमदम।

तेरे  बगैर  जीना  लगता  अजाब  जैसा,
आसां बनादे मिलके मेरा हाल  हमदम।

तेरी  इनायतों  का मन ने भरम है पाला,
सच करके अपना सपना करदे कमाल हमदम।

बढती चली गइ है  कुरबत की बेकरारी,
उमिद से भरा हो अपना विसाल हमदम।

दौरे  जहां  में कितनी  है  तंग  जिंदगानी,
तेरे सहारे  मासूम बने  बे मिसाल हमदम।

                              मासूम मोडासवी

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